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Friday, May 22, 2020

राजस्थान में खनिज सम्पदा

              राजस्थान में खनिज सम्पदा

                            राजस्थान में खनिज
  
खनिज - वे पदार्थ या तत्व जो खोद के निकाले जाते हैं खनिज कहलाते है।
खनिज से अयस्क प्राप्त होते है और अयस्क से धातु प्राप्त होती है।
राजस्थान में 81 प्रकार के खनिज पाए जाते है, जिनमें से 59 प्रकार के खनिजों का उत्खनन किया जाता है एवं 57 प्रकार के खनिजों का व्यावसायिक उत्खनन किया जाता है।
देश में खनिज भंडारण की दृष्टि से राजस्थान का दूसरा स्थान है।
राजस्थान खनिजों की विवीधता में देश में पहला स्थान रखता है इसलिए राजस्थान को खनिजों का अजायबघर कहते है।
राजस्थान का अलोह धात्वीक खनिज उत्पादन में प्रथम स्थान है तथा लौह खनिज की दृष्टि से 4 स्थान है।
राजस्थान का खनिजों की आय की दृष्टि से देश में 5 वा स्थान है। 
राज्य में खनिज नीति तीन बार घोषित की गई है।
प्रथम खनिज नीति -1978
दूसरी खनिज नीति - 1991
तीसरी खनिज नीति - 2015 

               राजस्थान में खनिजों के प्रकार


राजस्थान में खनिज दो प्रकार के पाए जाते है।
1. धात्विक खनिज - यह खनिज चमकदार व आघातवर्धनिय होते है। यह विद्युत के सुचालक होते है।
धात्विक खनिज दो प्रकार के होते हैं
लौह खनिज - वे खनिज जिसमे चुंबक्तव के गुण पाए जाते हैं

लौह अयस्क - लौह अयस्क चार प्रकार का होता है।
मैग्नेटाईट
हेमेटाइट
लिमोनाइट
सिडेराइट
राजस्थान में सर्वाधिक हेमेंटाइट लौह अयस्क पाया जाता है।  धात्विक  खनिज आग्नेय चट्टानों से निकलता है।
राजस्थान में आग्नेय चट्टाने अरावली प्रदेश में पाई जाती है।
लौह अयस्क उत्पादन क्षेत्र - 
जयपुर - चौमू , मोरीजा बानेला, 
दौसा - निमला राईसेला
झुंझुनू - डाबला सिंघाना
उदयपुर - नाथरा की पोल, थुर हुंडेर 
सीकर - नीम का थाना क्षेत्र
अलवर - पुरवा, राजगढ़, कुशाल गढ़
राजस्थान की सर्वाधिक लौह अयस्क उत्पादन खान मोरीजा बानोला जयपुर है।
राजस्थान में सर्वाधिक भंडारण की दृष्टी से नाथरा की पाल प्रमुख है।

तांबा - तांबा उत्पादन में राजस्थान का देश में दूसरा स्थान है।
तांबा का अयस्क कॉपर पाइराइटीज है।
तांबा उत्खनन क्षेत्र -
झुंझुनू - खेतड़ी सिंघाना
अलवर - खों दरीबा
उदयपुर - देलवाड़ा, केरावली, देबारी
सीकर - मीरा की नागल क्षेत्र, बन्ने वालों की ढाणी
भीलवाड़ा - पुर बनेड़ा
चूरू - बीदासर
देश में तांबे की सबसे बड़ी खान खेतड़ी में है।
खेतड़ी में भारत सरकार का उपक्रम हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड कारखाना स्थापित है।
मानव ने सर्वप्रथम ताम्र धातु का प्रयोग किया था।
तांबे का उपयोग सोने को कठोर बनाने में किया जाता है।

सीसा जस्ता -
इन्हे जुड़वा खनिज कहते है। राजस्थान में सिसे का अयस्क गेलेना (pbs) है। इसका ज्यादातर उत्पादन जावर (उदयपुर) व रामपुर आगूचा (भीलवाड़ा) में होता है
उत्खनन क्षेत्र -
उदयपुर - जावर की खान, मोगिया मगरा
राजसमंद - राजपुर दरीबा, बामनिया कलां
भीलवाड़ा - रामपुरा आगुचा
सवाई माधोपुर - चोथ का बरवाड़ा
अलवर - गुढा किशोरिदास
डूंगरपुर - मांडो की पोल
राजस्थान में जस्ता गलाने का सयंत्र है लेकिन सीसा गलाने का नहीं है
चंदेरिया चित्तौड़गढ़ में सुपर जिंक स्मेल्टर स्थापित है।
देबारी उदयपुर में भारत सरकार के सहयोग से हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड कारखाना स्थापित है
भारत में कुल चार जस्ता स्मेल्टर कारखाने है जिसमे दो राजस्थान के देबारी उदयपुर ओर दो चंदेरिया चित्तौड़गढ़ में है

चांदी -  चांदी के उत्पादन में राजस्थान का पहला स्थान है।
उत्खनन क्षेत्र -
उदयपुर - जावर की खान
राजसमंद - राजपुर दरीबा
जावर स्थित चांदी की खान की खोज राणा लाखा के काल में हुई थी
चांदी विद्युत का सुचालक होता है।

मेंग्नींज -
राजस्थान में मेंग्नीज का उत्पादन कम मात्रा में होता है।
इसका उपयोग लौह इस्पात उद्योग में इस्पात को कठोर बनाने
में किया जाता है।
उत्खनन क्षेत्र -
बांसवाड़ा - लिलवाना, तलवाड़ा, सांगवा,
उदयपुर - छोटी सार, बड़ी सार नगेडिया
राजसमंद - नरडिया

टंगस्टन -
राजस्थान में इसका अयस्क वुल्फेमाइट से टंगस्टन प्राप्त होता है।
उत्खनन क्षेत्र -
 नागौर - रेवंत भाकरी डेगाना
 सिरोही - वाल्दा बेड़ा बेरा, आबू रेवदर
 पाली - नाना कराब
टंगस्टन उत्पादन में राजस्थान का पहला स्थान है।
एडिसन बल्ब का फिलामेंट टंगस्टन का बना होता है।

सोना -
सोने के भंडारण बांसवाड़ा के जगतपुरा भुकिया, आनंदपुरा भूकिया तथा उदयपुर के रामपुरा ओर खेड़ा में है।
राजस्थान में सोने की खोज का कार्य बंगलुरू की कंपनी इंडो गोल्ड कर रही है।
सोना धातु प्रकृति में शुद्ध अवस्था में पाया जाता है

                 2. अधात्विक खनिज -

 वे खनिज पदार्थ जिनमें भंगुरता पाई जाती हो।
 इसमें प्रमुख रेडियोएक्टिव तत्व, ऊर्जा संसाधन, कीमती पत्थर आदि
आण्विक खनिज - रेडियोएक्टिव तत्व
यह निम्नलिखित राजस्थान पाए जाते हैं।

यूरेनियम -  भारत का यूरेनियम उत्पादन में राजस्थान का प्रथम स्थान है   
इसका अयस्क पिंच ब्लेड है।
उत्खनन क्षेत्र -
उदयपुर - उमरा क्षेत्र
सीकर - बांसवाड़ा ओर डूंगरपुर 
बेरेलीयम -
 इसके प्रमुख उत्खनन क्षेत्र
अजमेर -  बांदरसिंदरी
उदयपुर - शिकारबाड़ी
जयपुर - गुजरवाडा
लिथियम
इसका उत्खनन क्षेत्र राजगढ़ अजमेर है।
थोरियम -
 थोरियम का उत्खनन क्षेत्र
 पाली - भद्रावती,
 जैसलमेर ओर बाड़मेर है।
भारत में सर्वाधिक मात्रा में निकलने वाला आण्विक खनिज थोरियम केरल में निकलता है।

                      ऊर्जासंसाधन

कोयला -
पश्चिमी राजस्थान में जीवाश्म खनिज पाए जाते है।
थार के मरुस्थल में अवसादी चट्टानों की प्रधानता के कारण यहां परम्परागत ऊर्जा संसाधनों की प्रमुखता है।
कोयला चार प्रकार का होता है।
एंथ्रासाइट
बीटूमिनस
लिग्नाइट
पीट
कोयला भण्डार की दृष्टि से राजस्थान का तमिलनाडु के बाद दूसरा नंबर आता है।
राजस्थान में सबसे ज्यादा लिग्नाइट कोयले की प्रधानता है।
लिग्नाइट कोयला -
 लिग्नाइट कोयला अवसादी चट्टानो से प्राप्त होता है। थार के मरुस्थल में इसकी प्रधानता है।
उत्पादन क्षेत्र -
बीकानेर - पलाना, बरसींघसर, केसर देसर, नापासर, हाडला
बाड़मेर - गीरल, जालीपा, कपूरड़ी, भादका
नागौर - मेड़ता
एशिया की सबसे बड़ी लिग्नाइट खान पलाना बीकानेर में स्थित है
देश की लिग्नाइट कोयला उत्पादन की दृष्टि से सबसे बड़ी खान कपूरड़ी बाड़मेर है।
देश की लिग्नाइट कोयला भंडारण की दृष्टि से सबसे बड़ी खान पलाना बीकानेर में है।

पेट्रोलियम / खनिज तेल -
खनिज तेल अवसादी चट्टानों में पाया जाता है।
पश्चिमी राजस्थान ओर थार के मरुस्थल में इसकी प्रधानता है।
सबसे पहले तेल की खोज गुढा मालानी बाड़मेर में हुई थी।
तेल उत्पादक क्षेत्र ओर उसकी खोज
बाड़मेर सांचौर बेसिन - केयर्न एनर्जी
जैसलमेर बेसिन - फीनिक्स ओवरसीज
बीकानेर नागौर बेसिन - एस्सार ऑयल एनर्जी
विंध्य कगार क्षेत्र - ओएनजीसी
सर्वाधिक तेल उत्पादक क्षेत्र बाड़मेर सांचौर बेसिन में है।
पूनम क्षेत्र - बीकानेर नागौर बेसिन में स्थित है।

राजस्थान में तेल कुएं -
बाड़मेर सांचौर तेल क्षेत्र
यह तीन भागो में विभक्त है।
D A first -  ऐश्वर्या, मंगला, रागेश्वरी, सरस्वती,
DA 2nd -  भाग्यम, शक्ति
DA 3rd -  कामेश्वरि बेल्ट
अन्य - विजया
राजस्थान में 29 अगस्त 2009 को मंगला से पेट्रोलियम का उत्पादन शुरू किया गया ।
राजस्थान का पहला पेट्रोलियम उत्पादक क्षेत्र बाड़मेर है।
राजस्थान में तेल रिफाइनरी पंचभद्रा बाड़मेर में स्थित है, 16 जनवरी 2018 को इस रिफाइनरी का शुभारम्भ हुआ था।
रिफाइनरी स्थापना में राजस्थान का देश में 15 वा स्थान है तथा देश की 26 वी रिफाइनरी है।
भारत में सर्वप्रथम 1901 ई में असम डिगबोई में रिफाइनरी की स्थापना हुई थी।
Hpcl + राज्य सरकार के मध्य 14 मार्च 2013 को रिफाइनरी को लेकर एक समझोता हुआ था ।
Hpcl + राज्य सरकार के बीच पेट्रो केमिकल कॉम्पलेक्स समझोता 17 अगस्त 2017 में हुआ था जिसमें Hpcl ओर राज्य के बीच 74% + 26% की हिस्सेदारी है।

प्राकृतिक गेस - इसे पर्यावरण मित्र भी कहते है।
पर्यावरण गेस में कार्बन की उत्सर्जन मात्र कम होती है।

शाहगढ़ सब बेसिन - जैसलमेर बीकानेर में स्थित है।
यहां फोकस एनर्जी द्वारा गेस का उत्पादन किया जाता है।
राजस्थान में प्रमुख गेस क्षेत्र -
रामगढ़ - राजस्थान की सबसे पहले प्राकृतिक गेस आधारित परियोजना है।
भारत की सबसे पहली परियोजना अंता (बारां) में है पर यह राजस्थान की पहली परियोजना नहीं है क्युकी यह राजस्थान ओर मध्यप्रदेश की सयुक्त परियोजना है। इसमें दोनों राज्यो की 50%+50% की भागेदारी है।
जैसलमेर - मनिहारी टिब्बा, तनोट, साधुवाला, डान्डेवाला
बीकानेर - लोंगेवाला, बाघेवला
घटारू जैसलमेर में हीलियम गेस के भण्डार है।

कोल बेड मीथेन -
कोयले के साथ मीथेन का मिश्रण
राजस्थान में इसके भण्डार बीकानेर, बाड़मेर में है।

बहुमूल्य पत्थर
तामड़ा - इसे रक्तमणि या गार्नेट कहते है।
राजस्थान में इस खनिज का एकाधिकार है।
इस खनिज में आयरन ऑक्साइड पाए जाने के कारण इसे रक्तमणि कहते है।
उत्पादन क्षेत्र -
टोंक - राजमहल, जनकपुरा, देवली, कुशलपुरा,
अजमेर - सरवाड़
भीलवाड़ा - कमलपुरा, दादिया बालिया बेड़ा
तामड़ा का प्रमुख उत्पादन क्षेत्र राजमहल टोंक है।

पन्ना - इसे हरी अग्नि कहते है।
उत्पादन क्षेत्र -
राजसमंद - काला गुमान क्षेत्र
अजेमर - राजगढ़
पाली - गढ़वाली मारवाड़ में भी पन्ना के भण्डार मिले है।
ग्रीन फायर बेल्ट - राजगढ़(अजमेर) से काला गुमान क्षेत्र (राजसमंद) के बीच का क्षेत्र पन्ना जमाव क्षेत्र कहलाता है।

हीरा -
राजस्थान में हीरा भण्डार केसरपुरा चित्तौड़गढ़ में मिले है।

जिप्सम -
इसे हरसोंठ या खड़िया कहते है
जिप्सम उत्पादन में  राजस्थान का एकाधिकार है। जिप्सम उत्पादन में राजस्थान का देश में प्रथम स्थान है
जिप्सम उत्पादन क्षेत्र -
नागौर - गोठ मांगलोद, धांकोरिया, भदवासी,
बीकानेर - जामसर, सियासर, हरकासर,
पाली - खुटानी
जिप्सम का उपयोग क्षारीयता की समस्या को कम करने के लिए किया जाता है।

रॉक फास्फेट -
देश की सबसे बड़ी रॉक फास्फेट खान झामर कोटड़ा में है। यहां पर देश के कुल उत्पादन का 96% उत्पादन होता है।
उत्पादन क्षेत्र -
उदयपुर - झामर कोटड़ा, धकन कोटड़ा
जैसलमेर - लाठी सीरीज क्षेत्र, बिरमानिया
जयपुर - अचरोल
सीकर - करपुरा
इसका उपयोग अमलियता की समस्या को दूर करने के लिए किया जाता है।

एस्बेटोस -राजस्थान में इसके  अयस्क क्राईसोलाइट ओर
एंफीबॉल है।
उत्पादन क्षेत्र -
उदयपुर - ऋषभदेव, खेरवाड़ा, देवगढ़
अजमेर - नरेला
पाली - सेंद्रा
राजस्थान में एकमात्र प्राकृतिक रेशा खनिज एस्बेटोस है।
उपयोग - तापरोधी वस्तुओ व उपकरण निर्माण में

अभ्रक - अभ्रक उत्पादन में राजस्थान का देश तीसरा स्थान है।
अभ्रक आग्नेय चट्टनो के रूप में काले अभ्रक के छोटे छोटे रूप में पाया जाता है।
उत्पादन क्षेत्र -
भीलवाड़ा -- भूनास, दांता,
उदयपुर - चंपा गुढ़ा
सीकर - खंडेला, रोहिला
टोंक - शंकरवाड़ा
उपयोग - अभ्रक ईट उद्योग में , विद्युत रोधी उपकरण में

चाइना क्ले/फायर क्ले
इनका उत्पादन क्षेत्र बीकानेर है
इनका उपयोग चीनी मिट्टी के बर्तन बनाने में ,अग्निरोधक पदार्थ बनाने में किया जाता है।

इमारती पत्थर
इमारती पत्थर का राजस्थान का एकाधिकार है
इमारती पत्थर रूपांतरित चट्टानों का उदाहरण है।
उत्पादन क्षेत्र -
राजसमन्द - राजनगर
मकराना - सफेद संगमरमर
भैंसलाना जयपुर - काला संगमरमर
उदयपुर - हरा संगमरमर
जालोर - गुलाबी संगमरमर
जैसलमेर - पीला संगमरमर
पाली - सतरंगा संगमरमर
कोटा - कोटा स्टोन

फेल्सपार
उत्पादन क्षेत्र -
अजमेर - मकरेरा
चीनी मिट्टी के बर्तन बनाने में

पाईराइट
उत्पादन क्षेत्र - सलादीपूरा सीकर में
उपयोग रासायनिक उर्वरक बनाने में

पोटाश -
उत्पादन क्षेत्र -
बीकानेर, गंगानगर, चूरू, हनुमानगढ़, नागौर

घीया पत्थर
राजस्थान में सबसे ज्यादा घीया पत्थर उदयपुर में पाया जाता है।
उत्खनन क्षेत्र -
उदयपुर - देवपुरा, नाथरा की पाल, ऋषभदेव
दौसा - डागोथा झरना क्षेत्र
इसका उपयोग टेलकम पाउडर में , खिलौने बनाने में किया जाता है।

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